Skip to content
Home टेक्नोलॉजी रोड मैप राष्ट्रीय प्रवर्तन (इनोवेशन) परियोजना
राष्ट्रीय प्रवर्तन (इनोवेशन) परियोजना E-mail
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा टाइफैक को, विश्व बैंक से आर्थिक सहायता प्राप्त राष्ट्रीय प्रवर्तन योजना (एन.आई.पी.) के लिए व्यापक परियोजना रिपोर्ट (डी.पी.आर.) बनाने का कार्य सौंपा गया था । एन.आई.पी. को राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम व्यवहारों पर डिजाइन आधारित होना है ताकि चालू प्रवर्तन संचालित गतिविधियों में सुधार, विस्तार और उन्नयन हो सके । साथ ही वृद्धि और गरीबी उन्मूलन पर उच्च प्रभाव के लिए कुछ नये प्रयासों को शुरू किया जा सके । अन्य बातों के अलावा, इसमें सार्वजनिक नीति कार्य-क्षेत्रों और भारतीय अर्थव्यवस्था में उत्पादकता, सतत वृद्धि और भारतीय अर्थव्यवस्था में गरीबी में कमी के वाहक के रूप में प्रवर्तन को मजबूत बनाने वाले विशिष्ट सहायता कार्यक्रम भी शामिल हैं ।

डी.पी.आर. जून, 2008 में पूरी हुई और इसे डी.एस.टी. के माध्यम से विश्व बैंक को भेजा गया । विश्व बैंक ने इस गतिविधि को चलाने के लिए 0.4 मिलियन यू.एस. डालर्स की डी.आई.एफ.आई.डी. सहायता प्रदान की है । डी.पी.आर. में निम्नलिखित तीन अवयव हैं :

अवयव -I: प्रबंधन का सुदृढ़ीकरण और क्षमता निर्माण : इसमें आई.पी.आर. सिस्टम को मजबूत बनाना, डायास्पोरा नेटवर्क्स का बेहतर उपयोग, अवशोषण क्षमता की वृद्धि और एस.एम.ई.,एस. में प्रौद्योगिकी फ्यूजन जैसे हस्तक्षेप शामिल होंगे ।
अवयव -II: नई  प्रौद्योगिकी के विकास में अनुसंधान हेतु एस.एम.ई.,एस. को सहायता प्रदान करना : उचित अंगीकरण/यू.एस. एस.बी.आई.आर. कार्यक्रम जैसे मॉडलों का अनुकूलन (एडाप्टेशन)
अवयव -III: प्रौद्योगिकी के व्यवसायीकरण को मजबूत बनाना : निचले स्तर/ग्रामीण प्रवर्तको (इनोवेटर्स) से आविष्कारों को बाजार तक ले जाने में सहायता करना । यह अवयव नई  इकाई के सृजन को जोड़ेगा जोकि निधियों की निधि को संचालित करेगी और प्रौद्योगिकी उन्नयन/व्यवसायीकरण में सुविधा प्रदान  करेगी ।

संचालित गतिविधियां

निम्नलिखित अध्ययन शुरू किये गये :
(i) एम.एस.एम.,ई.एस. - प्रवर्तन एवं प्रौद्योगिकी अवशोषण
(ii) बौद्धिक सम्पदा अधिकार तंत्र
(iii) 'विश्व ज्ञान का मूल्यांकन'
(iv) चुने हुए एशियन देशों में एस.बी.आई.आर. टाइप योजनाओं का अनुभव
(v) प्रौद्योगिकी व्यवसायीकरण को सुदृढ़ बनाना
उपरोक्त के अलावा दो संकल्पना नोट भी तैयार किये गये जिनमें से एक 'इन्क्यूबेशन निधि का ढांचागत सहायता संचालन' एवं दूसरा 'फर्मों हेतु संभावित कारोबार मॉडल जो कि संभावित वित्तीय और अपेक्षित ढांचागत सहायता को निहित करते हुए सुविधा और  मध्यस्थता सेवाएं  उपलब्ध करायेंगे' पर है ।

डी.पी.आर. निर्माण विधि :


डी.पी.आर. की तैयारी, तीनों अवयवों के लिए विभिन्न परामर्शदाताओं की पहचान के साथ शुरू हुई । अधिक विस्तृत निवेशों (इनपुट्स) और व्यापक फीड बैक प्राप्त करने के लिए टाइफैक ने 'बढ़ते हुए भारतीय प्रवर्तन : मुद्दे,अवसर और समाधान' विषय पर नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस (यू.एस.) के साथ 18 दिसम्बर, 2007 को नई दिल्ली में एक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया । इस सम्मेलन का उद्देश्य प्रवर्तन के भारतीय अनुभवों को बांटना और यू.एस. अनुभवों से सीखना था और विशेषकर एन.ए.एस. के प्रवर्तन प्रेरक कार्यक्रमों से व्यापक समीक्षा/किए गये मूल्यांकन से लाभ लेना था । इस सम्मेलन के बाद की गतिविधि के रूप में एक शैक्षिक संगठन-उद्योग सम्पर्क बैठक 20 दिसम्बर, 2007 को मुम्बई में आयोजित की गयी ।
टाइफैक ने एन.आई.पी. के अन्तर्गत शुरू किये गये अध्ययनों के लिए दो प्राथमिक कार्यशालाएं आयोजित कीं । पहली कार्यशाला 18 मार्च, 2008 को नई दिल्ली और दूसरी 20 मार्च, 2008 को मुम्बई में आयोजित हुई । इनकी उद्देश्य एन.आई.पी. के विभिन्न अवयवों हेतु नियुक्त परामार्शदाताओं और पणधारकों (स्टेक होल्डर्स) के बीच सम्पर्क विकसित करना था । इसका लक्ष्य अध्ययनों को यथासंभव व्यापक बनाना था । ये कार्यशालाएं परामर्शदाताओं को उनकी रिपोर्टों के लिए उपयोगी जानकारी प्राप्त करने में एक लाभकारी प्लेटफार्म सिद्ध हुई ।