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घरेलू प्रौद्योगिकी कार्यक्रम E-mail
टाइफैक द्वारा घरेलू प्रौद्योगिकी कार्यक्रम (एच.जी.टी.) का 14 वर्षों यानी 1992 से 2005 की अवधि तक कार्यान्वयन किया गया ।

एच.जी.टी. को प्रवर्तन (इनोवेशन) श्रृंखला में प्राथमिक अवस्था के प्रौद्योगिकी प्रयासों को संचालित करने वाले छोटे और मंझोले आकार के उद्यमों (एस.एम.ई.) को सहायता देने पर केन्द्रित करने हेतु डिजाइन किया गया था । इसका मुख्य उद्देश्य एस.एम.ई को पायलट उत्पादन स्तर पर विशिष्ट प्रवर्तनों (इनोवेशंस) के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि उत्पाद की अन्तिम मार्केटिंग तक की दूरी को कुछ कम किया जा सके । इस परियोजना को पूरी तरह कार्यान्वित करने में  टाइफैक का कुछ समय लगा । शुरूआती वर्षों में एच.जी.टी. सहायता प्राथमिक रूप से प्रयोगशालाओं को ही दी गयी । बाद में और अधिक कम्पनियों को अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को स्वयं चलाने के लिए प्रोत्साहित किया गया । टाइफैक अनुभव ने यह दर्शाया कि एक बड़ी सीमा तक, यह योजना एस.एम.ई. की उनके और बाजार के लिए नई प्रौद्योगिकी को प्राप्त करने की झिझक को दूर करने में सहायक रही ।

एस.एम.ई.,एस. और अनुसंधान प्रयोगशालाओं/शैक्षिक संस्थानों के बीच सिद्ध प्रयोगशाला स्तर प्रौद्योगिकियों के पायलेट स्तर के उन्नयन हेतु सहयोगी प्रयासों के एच.जी.टी. मॉडल के फलस्वरूप अच्छी तादाद में ऐसे उत्पादों का उत्पादन हुआ है जिनमें नई प्रौद्योगिकियों का प्रयोग किया गया है और बाजार स्थलों पर जो संभावित रूप से बिक्रीयोग्य है । मॉडल, प्रवर्तन श्रृंखला      (इनोवेशन चैन) के  इस विशिष्ट मोड़ पर अपेक्षित तकनीकी और वित्तीय सहायता की स्थिति को भी स्पष्ट करता है । एच.जी.टी. दृष्टिकोण ने परिवर्तन शील बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त करने की आधारशिला बनने के साथ -साथ रोजगार प्रदान करने की संभावना वाले क्षेत्र के रूप में एस.एम.ई.,एस. की महत्ता को मान्यता दी है ।

कार्यक्रम प्रभाव विश्लेषण
कार्यक्रम औपचारिक रूप से वर्ष 2005 में बन्द हुआ । योजना के प्रभाव के मूल्यांकन के क्रम में 76 एच.जी.टी. परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा वर्ष 2007 में की गयी । अधिकांश एच.जी.टी. (प्रक्रिया केन्द्रित) परियोजनाओं का लक्ष्य 'पायलट संयंत्र स्तर पर व्यवहार्य उत्पादन को दर्शाना था । जबकि कुछ (उत्पाद केन्द्रित परियोजनाएं 'बिक्रीयोग्य प्रोटोटाइप' के विकास हेतु थी)  सफलता दर 79% (76 में से 60) रही ।

एस.एम.ई. प्रवर्तनों (इनोवेशंस) का उत्प्रेरण
उद्योगों के साथ 56 परियोजनाओं (74%) को सहायता प्रदान की गयी । एच.जी.टी. गतिविधि का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य एस.एम.ई.एस. की नई प्रौद्योगिकियों के प्रयोग के प्रति झिझक को दूर करना था । इसमें अच्छी सफलता मिली ।

29 परियोजनाएं (38%) व्यवसायीकरण तक पहुंची । इनमें से 8 परियोजनाओं नियमित कार्य कर रही हैं । जबकि 21 परियोजनाओं को सतत व्यवसायिक उत्पादन करना है । 30 परियोजनओं (39.5%) ने व्यवसायी कार्य शुरू नहीं किये । दो बाधाओं के विषय में सूचना मिली वे हैं :

1) नई  प्रौद्योगिकी परियोजनाओं हेतु धन की कमी (बैंक और वेंचर कैपिटल फंड्स इच्छुक नहीं थे) और
2) पहला ग्राहक समस्या (ग्राहक प्रमाणित ब्रांडो और उत्पादों को वरीयता देते हैं) । यहां यह महत्वपूर्ण है कि यहां तक कि जब पायलट संयंत्रों को पूर्ण स्थापित क्षमता के साथ चलाया जता है, तो वे फर्म को ब्रेक-इवन पाइन्ट तक पहुंचने में सहायता नहीं देंगे ।

पायलट संयंत्र क्षमताएं को लाभदायक व्यवसायी कार्यों के लिए मापित नहीं हैं । इसलिए इस परियोजना का व्यवसायिक सफलता के लिए उन्नयन करना है । सामान्यतः देरी के परिणामस्वरूप बाजार में अन्य वैकल्पिक उत्पादों आ जाते हैं । परियोजनाओं से पुनर्भुगतान टाइफैक द्वारा उपलब्ध कराई गयी आर्थिक सहायता के आधे से अधिक है । यह सहायता 28 छोटी फर्मों, 22 में शुरू हुई कम्पनियों, 20 प्रयोगशाला परियोजनाओं और 6 मध्यम आकार की कम्पनियों को प्रदान की गयी ।