| फ्लाई एश मिशन |
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फ्लाई एश मिशन उपयोगिता कार्यक्रम (एफ.ए.यू.पी.), भारत सरकार के मिशन मोड में प्रौद्योगिकी परियोजना, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डी.एस.टी.) ऊर्जा मंत्रालय (एम.ओ.पी.)और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (एम.ओ.ई.एफ.) की संयुक्त गतिविधि है । विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग इसकी नोडल एजेंसी है और प्रौद्योगिकी सूचना, पूर्वानुमान एवं मूल्यांकन परिषद् (टाइफैक) कार्यान्वयन एजेंसी है । भारत में बड़ी मात्रा में फ्लाई एश निकलता है । हमारी ऊर्जा मांग अधिकांशतः कोयला आधारित तापीय स्टेशनों से पूरी होती है । फ्लाई एश उत्पादन के आगे और बढ़ने की आशा है जबकि कोयला कम से कम आगामी 25 वर्षों तक ऊर्जा का मुख्य स्रोत बना रहेगा । फलाई एश जोकि एक संसाधन सामग्री है, यदि इसकी ठीक से व्यवस्था नहीं की गयी तो इससे पर्यावरण के लिए चुनौतियां पैदा हो सकती हैं । एफ.ए.यू.पी. फ्लाई एश के सुरक्षित प्रबंधन और लाभकारी उपयोग के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी विकास/निदर्शन, सूचना को पहुंचाने, जागरूकता लाने, बहुगुणी प्रभावों की सुग्राहयता, नीति कार्यों हेतु इनपुट्स उपलब्ध कराने आदि के लिए विभिन्न परियोजानाओं/गतिविधियों को संचालित कर रहा है । वर्तमान स्थिति सन 2002 में मिशन को फ्लाई एश उपयोगिता कार्यक्रम (एफ.ए.यू.पी.) में परिवर्तित किया गया । अब यह कार्यक्रम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डी.एस.टी.) को अन्तरित हो चुका है । इच्छुक व्यक्ति सम्पर्क करें : श्री विमल कुमार सलाहकार फ्लाई एश युनिट विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग टेक्नोलॉजी भवन न्यू महरौली रोड नई दिल्ली - 110016 |



