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परिचय
टाइफैक एक स्वायत्तशासी संस्थान है । इसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वर्ष 1988 में, राष्ट्रीय महत्व के चुने हुए क्षेत्रों में, प्रौद्योगिकी कार्यों के मूल्यांकन और इनोवेशन में सहायता के लिए स्थापित किया गया   था । टाइफैक उद्योगों और शिक्षा जगत के बीच घनिष्ठ सम्पर्क तथा सतत एवं संयुक्त प्रयासों के माध्यम से प्रौद्योगिक इनोवेशन को प्रोत्साहन देकर, देश में प्रौद्योगिकी विकास के लिए प्रयास करता है ।
टाइफैक ने विभिन्न उभरते हुए प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में टेक्नोंलॉजी विजन को तैयार करने के महत्वपूर्ण कार्य प्रारंभ किये हैं । टाइफैक के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में टेक्नोलोजी विजन 2020 तैयार किया गया जिसमें सोलह प्रौद्योगिकी क्षेत्रों और एक सेवा (सर्विस) क्षेत्र समेत 17 दस्तावेज प्रस्तुत किये गये । राष्ट्र की सेवा के 25 से अधिक वर्षों में, टाइफैक द्वारा अनेक प्रौद्योगिकी मूल्यांकन और पूर्वानुमान रिपोर्टें तैयार की गयीं ।
मैसूर में 103 वीं भारतीय विज्ञान काँग्रेस का उद्घाटन करते हुए भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने टाइफैक द्वारा तैयार टेक्नोलॉजी विजन 2035 का लोकार्पण किया । इसके साथ राष्ट्रीय प्राथमिकता और महत्व के 12 थीमेटिक क्षेत्रों में टेक्नोलोजी रोडमैप भी जारी जारी किेये जा रहे हैं । इनके नाम : शिक्षा, चिकित्सा विज्ञान एवं स्वास्थ्य रक्षा, खाद्य एवं कृषि, जल, ऊर्जा, पर्यावरण, आवास, परिवहन, आधार भूत सुविधाएं, निर्माण सामग्री एवं सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आई.सी.टी.)  हैं ।
हाल ही में, भारत के माननीय राष्ट्रपति महोदय ने टाइफैक को, उसकी किरण – आई.पी.आर. योजना के लिए रानी लक्ष्मी बाई अवार्ड (नारी शक्ति पुरस्कार, 2015) से सम्मानित किया । यह योजना बौद्धिक सम्पदा अधिकारों (आई.पी.आर.) के प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं के सशक्तीकरण पर केन्द्रित है ।

झलकियां
विगत वर्षों में, टाइफैक की कुछ गतिविधियो की झलकियां निम्नलिखित हैं 
  • बृहद (मेगा) पूर्वानुमान गतिविधियां (विश्व में अनूठी)
  1. टेक्नोलोजी विजन 2020 – 2020 तक विकसित भारत के लिए उत्साही कल्पना ( फायर्ड इमेजिनेशन)
  2. टेक्नोलॉजी विजन 2035 – नागरिक केन्द्रित विजन की ओर प्रतिमान अंतरण (पैराडाइम शिफ्ट)
  • केन्द्रित प्रौद्योगिकी पूर्वानुमान/मूल्यांकन/टेक्नो – मार्केट सर्वे रिपोर्टें - 300 से अधिक हितधारकों के लिए टेक्नोलोजी ट्रेजेक्ट्रिज उपलब्ध कराई
  • राष्ट्रीय महत्व के चुने हुए क्षेत्रों में मिशन मोड / लक्षित कार्यक्रम
  1. शुगर टेक्नोलॉजी मिशन – प्रोत्साहक प्रौद्योगिकी के परिणामस्वरुप गुणवत्ता एवं दक्षता में वृद्धि हुई
  2. फ्लाई एश मिशन – फ्लाई एश के उपयोग में 3% से 50% अधिक तक की छलांग
  3. एडवांस कम्पोजिट मिशन – दक्षता एवं टिकाऊपन में वृद्धि के माध्यम से सिविल क्षेत्रों में 30 से अधिक नवीन कम्पोजिट उत्पादों को प्रस्तुत किया ।
  4. मिशन मोड में टेक्नोलोजी विजन 2020 परियोजनाओं पर आवरण (अम्ब्रेला) योजना – विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकियों का उत्प्रेरित विकास
  5. शहरी नवीकरण और इंजीनियरिंग में प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग हेतु मिशन – पायलट स्तर का हस्तक्षेप, बाद में जे.एम.एन.यू.आर.एम. प्रस्तुत
  6. राष्ट्रीय बांस अनुप्रयोग मिशन – इसके परिणामस्वरुप पूर्ण शक्ति सम्पन्न नये संगठन नेक्टर का निर्माण
  7. सहयोगात्मक ऑटोमोटिव आर. एवं डी. (सी.ए.आर.) कार्यक्रम – संघ (कंसट्रिया) के माध्यम से पूर्व प्रतिस्पर्धात्मक प्रौद्योगिकी विकास के लिए पहला मॉडल
  • इनोवेशन सहायता
  • पेटेंट सुविधा केन्द्र - आई.पी. संस्कृति को प्रोत्साहन, महत्व के आदेशों द्वारा पेटेंटिंग में वृद्धि एवं किरण आई.पी.आर. कार्यक्रम (महिला वैज्ञानिक योजना) के माध्यम से भारत में 10% सक्रिय पेटेंट एजेन्टों को तैयार करना ।
  • घरेलू प्रौद्योगिकी कार्यक्रम – एस.एम.ई.एस. के लिए पहला प्रौद्योगिकी जोखिम रहित मॉडल
  • तक्नो – उद्यमी (टेक्नोप्रीन्यूर) प्रोत्साहन कार्यक्रम (टी.ई.पी.पी.) – व्यक्तिगत स्तर पर इनोवेशन संभावनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए पहला मॉडल
  • प्रौद्योगिकी परिष्करण एवं विपणन (मार्केटिंग) कार्यक्रम (ट्रीमैप) के इनोवेशन को बाजार से सम्पर्क जोड़ने हेतु पहला कार्यक्रम
  • टाइफैक सिडबी प्रौद्योगिकी इनोवेशन कार्यक्रम (सृजन) – उन्नत प्रयोगशाला इनोवेशन को बाजार स्तर तक  लाना ।
उद्देश्य
  • विभिन्न समूह क्षेत्रो के साथ भारत और विदेशों में अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में वर्तमान प्रौद्योगिकी स्तर एवं भावी प्रौद्योगिकीय विकासों की जांच एवं मुल्यांकन हेतु विशेषज्ञ उप – समूहों की स्थापना करना और 10 वर्षों अथवा अधिक समय को समाहित करते हुए, प्रौद्योगिकी पूर्वानुमान रिपोर्टें तैयार करना, विशेषकर सम्बद्ध उत्पादन क्षेत्रों में
    क) वित्तीय स्रोतों का वास्तविक निवेश एवं
    ख) बड़ी मात्रा में उत्पादन
  • उपयुक्त स्रोतों से प्राप्त करना और 10 और 25 वर्षों की समयावधि के लिए अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में सामग्री और सेवाओं की संभावित मांग को प्रकृति और मात्रा के लिए निम्नलिखित के आधार पर परियोजित करना
क) नियामक (नार्मेटिव) और
ख) खोजी अप्रोचेज एवं प्रौद्योगिकीय परिवर्तनों की दिशा और विस्तार पर सुझाव देना जोकि देश के वर्तमान और अनुमानित स्रोत आधार को देखते हुए, इन मांगों को पूरा करने की दृष्टि से अनिवार्य समझे जाएं ।
  • संभावित प्रभावों और परिणामों, चाहे वे वांछित हो या अंवाछित, पुरानी प्रौद्योगिकियां हो या समाज से निकलने वाली नई प्रौद्योगिकियां, इन सबके प्रकटन को ध्यान में रखते हुए प्रौद्योगिकी प्रभाव विवरण तैयार करना एवं भविष्य केन्द्रित परिदृश्यों के सृजन द्वारा, उनके लघु अवधि और दीर्ध अवधि प्रभावों के माध्यम से निर्णयकर्ताओं को संकेत देना । टी.आई.एफ. एवं ए अध्ययनों पर आधारित एवं निम्नलिखित को ध्यान में रखते हुए
(क) भविष्य को ध्यान में रखते हुए देशकी जरुरतों से संबंधित आवश्यक प्रौद्योगिकियों की समय पर उपलब्धता    को सुनिश्चित करना तथा नई प्रौद्योगिकियों के विकास और उनके अनुप्रयोग के बीच लगने वाले समय को कम करना
(ख) प्रौद्योगिकी विकास एवं प्रौद्योगिकी आयात (इम्पोर्ट) नीतियों के बीच उद्देश्यपूर्ण सम्पर्क स्थापित करना ताकि देश की सामाजिक आर्थिक, पर्यावरण और सुरक्षा जरुरतों के संदर्भो में, अनुसंधान के प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान की जा सके और ऐसी प्राथमिकताओं पर आधारित प्रौद्योगिकी विकासों के लिए नीतियां तैयार करना एवं सुझाव देना और विभिन्न क्षेत्रों में उद्देश्यपूर्ण अनुसंधान के कार्यक्रम बनाना ।
  • उपरोक्त उद्देश्यों को पूरा करने के क्रम में उचित सूचना संग्रह, विश्लेषण एवं कार्यक्रम समूहों पर विचार करना और उनकी स्थापना करना ।